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क़ुर्बानी के नाम पर पाखण्ड

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ये कैसा धर्म के नाम पर निर्दोष जानवरो की वली या क़ुर्बानी दी जाती है?जिस ईश्वर ने हमें बनाया है उसको हम भिन्न नाम से पुकारते लेकिन भाव एक ही है । हमारा प्रश्न यह है जिसने संसार की रंचना की है जीव जन्तु,पेड़ पौधे, इनसे सबसे अनमोल रंचना मानव बनाया है जिसने अपने दिमांग से संसार की कल्पनाओ को साक्षातकार करवाया है ।आज हम चाँद पर बसने जा रहे है मंगलग्रह पर जीवन के प्रमाण को साकार कर रहे है।अपने देश को चारो दिशाओ से सुरक्षित करने के लिए परमाणु का विकसित किया है और हम यह भूल गये है कि अपने जीव की सतुष्टी के लिए निर्दोष की वली और क़ुर्बानी का नाम देते है क्यो? जिसने सबकुछ बनाया है वो क्यो अपने ही अंग को काटकर ख़ुश होगा… सोचो हम अपने पिता की संताने है जो 5 भाई बहिन है । क्या कभी भी पिता चायेगे कि तुम दूसरे पुत्र या पुत्री की हत्या कर दो हम ख़ुश हो जायेगे। नहीं बल्कि दुख होगा पिता यही चायेगे कि हमारे बच्चे आपस में मिलजुल के रहें। हम अपने स्वार्थ के लिए आपस में कलेश करते है..अगर प्रभु बलि क़ुर्बानी से प्रश्न्न हो जाये तो जो जानवर एक दूसरे पर आश्रित हो उनपर प्रभु सदेव ख़ुश रहे ….पर नहीं अगर ऐसा होता तो हर कोई प्रभु को पाने के लिए एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाये सब बलि ही देने लगे। अगर बलि देना ही है तो खुद की दो रावण की तरह जिसने पाने की ऐसी हठ ठान ली थी जिसने स्वय के शीर्ष को सम्मपित कर दिया । अगर प्रभु को पाना ही चाहते हो तो सच में उसके बनाये संसार की सेवा करना सब जीव जन्तु की सेवा करना ।प्यासे को पानी भूखे को भोजन असाय का सहारा बनो …. धर्म के नाम पर आडम्बर पाखण्ड का त्याग करें । इस बकरीईद पर क्यो क़ुर्बानी का नाम देकर बकरो की हत्या करे अगर क़ुरान पड़ा होता तो सही अर्थो में क़ुर्बानी का अर्थ समझते अपने प्रिय पुत्र की क़ुर्बानी दी थी तुम सब की जो भी प्रिय वस्तु हो उसका त्याग करो तो यही होगी सच्ची कुर्बानी…….



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
September 23, 2015

आदरणीया.. सार्थक और विचारणीय संदेश ! अच्छी प्रस्तुति हेतु सादर आभार !

    akankshajadon1 के द्वारा
    September 24, 2015

    बहुत बहुत धन्यवाद वाद महोदय जी…

rameshagarwal के द्वारा
September 23, 2015

जय श्री राम हम सब भगवन की संताने है और यदि हम जीवनदान नहीं कर सकते तो किसी की जान लेने का कोई अधिकार परन्तु मानव इतना नीचे गिर गया की अपने मतलब के लिए निदोश जानवरों की बहुत क्रूर तरीके से से मारते और अपने को आधुनिक कहते लेकिन हम लोगो के कहने से कुछ नहीं होगा सार्थक विचार परन्तु यदि किसी बीजेपी यहिन्दू नेता ने कह दिया होता तो टीवी में डिबेट का टॉपिक और ब्रेकिंग न्यूज़ बन जाता.आपने अच्छा और सार्थक लेख लिखा.

    akankshajadon1 के द्वारा
    September 24, 2015

    धन्यवाद महोदय जी माना मेरी आवाज़ अभी भिड़ में गुम है, पर ये सही अगर कोई नेता ने कहाँ होता तो तिल का ताड बनने में समय नहीं लगता तो क्या हम अपने विचारो को दबा दे नहीं ना जो गलत है उसे लिखना ही है ! अपना कर्म हमें करना है हर इंसान को सोचने मजबूर करना है ताकि अगर थोड़ी सी इंसान्यित बची है तो ग़लत नहीं करना है बल्कि उसके खिलाफ सोच बदलनी होगी !(सोच बदलो देश बदलेगा) अपका बहुत बहुत आभार……

Deepak Kapoor के द्वारा
September 26, 2015

आकांक्षा जी, बहुत अच्छे विचार और बहुत अच्छी भावनाए है आपकी, ये सही बात है कि कोई अपने ही बच्चों की कुर्बानी से खुश कैसे हो सकता है, और फिर दुसरे के जीवन का अंत करना कुर्बानी कैसे हो सकती है पर कमियां सिर्फ यहीं नहीं है, तमाम मंदिरों में भी मुझे कष्ट होता है जब मैं ये देखता हूँ की प्रतिदिन बकरे की बलि चढ़ती है देवी माँ को खुश करने के लिए, हमें उसका भी विरोध करना चाहिए, पर ये अच्छा है की आपने उन नीरीह बेजुबानो की तरफदारी की, मुझे जानवरों से बेइंतहा लगाव है और मैं उनके पक्ष में लिखा लेख कहीं भी मिलता है तो जरूर पढता हूँ। आपसे विनम्र निवेदन है की कल, २७ सितम्बर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर जरूर पढ़ें - हिंदुस्तान का सबसे ख़ूबसूरत गुमनाम जिला - निश्चय ही आपको अच्छा लगेगा, ये मेरी १० साल की मेहनत है धन्यवाद दीपक कपूर http://www.superawakening.com

    akankshajadon1 के द्वारा
    September 26, 2015

    महोदय जी धन्यवाद जी।आपका लेख किसपर आयेगा?जागरण जक्सन पर या किसी ओर पर,,,,,


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